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कोरोना से डरना नहीं लडना हैं, जानिए कैसे | Follow the Covid19 Guideline

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प्रिय पाठक, हम आशा करते हैं कि आप और आपके प्रियजन स्वस्थ होंगे। हम आप लोगों से कोविड-19 से लड़ने के लिए "सफाई भी, दवाई भी, कड़ाई भी" के मंत्र का पालन करने का अनुरोध करते हैं। कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में टीका ही सबसे बड़ा हथियार है, अतः आप सभी से निवेदन है कि कृपया अपनी बारी आने पर टीका जरुर लगवाएं और ऐसा करने के लिए दूसरों को भी प्रेरित करें। ध्यान रखें की टीका लगने के बाद भी मास्क अवश्य पहने, एक दूसरे से दो गज की दूरी रखें और हाथ बार बार धोना न भूलें। बिना काम भीड़ भरी जगहो पर जाने से बचें।  साथ ही कोरोनो  गाइडलाइन का पालन करें। हमें पुरा विश्वास है कि आप इन वादों पर खरा उतरने का प्रयास अवश्य करेंगे। Covid19 का टीका लगवाने के लिए www.cowin.gov.in या आरोग्य सेतु एप्प पर रजिस्टर करें। ✍ राजस्थान प्रदेश न्यूज़ - आप और आपके परिवार के लिए अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है। धन्यवाद! आपका जीवन खुशियों से भरा रहें।

20 लाख बेरोजगार युवाओं का भविष्य अंधेरे में, 5वीं बार Postponed होगी Reet Exam

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  जयपुर:  कोविड-19 महामारी के कारण एक बार फिर देश लॉक डाउन का सामना कर रहा है। ऐसे में राजस्थान प्रदेश की कोरोना के कारण हालत और भी खराब है। लोग रोजगार से बेरोजगार हो गए हैं और अपने घर चले गए हैं।  ऐसे में जो विद्यार्थी नौकरी की तलाश में पिछले 2 साल से तैयारी कर रहे थे, वे अब घर जा चुके हैं। सभी प्रकार की कोचिंग स्कूल और कॉलेज बंद हो चुके हैं। मई माह में आयोजित होने वाली परीक्षाएँ रद्द हो चुकी है। जून माह में आयोजित होने वाली परीक्षाएँ रद्द करने के गोविंद सिंह डोटासरा ने दिए संकेत। 5 वीं बार Postponed हो सकती है Reet Exam  पिछले ढाई साल में पांचवी बार रीट परीक्षा की तारीख बदल सकती है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने एक बयान में कहा है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण 20 जून को रीट की परीक्षा आयोजित नहीं करा सकते हैं। इस समय लोगों की जान बचाना हमारे लिए आवश्यक है। रीट परीक्षा 20 जून को हम नहीं करा सकते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलकर फैसला लिया जाएगा। जब प्रदेश के हालात सामान्य हो जाएंगे। तब हम रीट परीक्षा आयोजित करा सकते हैं। हम इस रीट परीक्षा को जल...

बदलते युग में जानिए कैसे लुप्त हो गई हमारी संस्कृति- बदलता भारत

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मेरे परदादा संस्कृत और हिंदी जानते थे, माथे पे तिलक और सर पर पगड़ी बाँधते थे, फिर मेरे दादा जी का दौर आया, उन्होंने पगड़ी उतारी पर जनेऊ बचाया। मेरे दादा जी अंग्रेजी बिलकुल नहीं जानते थे जानना तो दूर अंग्रेजी के नाम से कन्नी काटते थे, मेरे पिताजी को अंग्रेजी थोड़ी थोड़ी समझ में आई, कुछ खुद समझे, कुछ अर्थ चक्र ने समझाई। पर वो अंग्रेजी का प्रयोग मज़बूरी में करते थे, यानि सभी सरकारी फार्म हिन्दी में ही भरते थे जनेऊ उनका भी अक्षुण्य था, पर संस्कृत का प्रयोग नगण्य था। वही दौर था जब संस्कृत के साथ संस्कृति खो रही थी इसीलिए संस्कृत मृत भाषा घोषित हो रही थी, धीरे धीरे समय बदला और नया दौर आया, मैंने अंग्रेजी को पढ़ा ही नहीं, अच्छे से चबाया। मैंने खुद को हिन्दी से अंग्रेजी में लिफ्ट किया, साथ ही जनेऊ को, पूजा घर में शिफ्ट किया, मै बेवजह ही दो चार वाक्य अंग्रेजी में झाड जाती हूँ शायद इसीलिए समाज में, पढ़ा लिखा कहलाती हूँ। और तो और मैंने बदल लिए कई रिश्ते नाते हैं, मामा, चाचा, फूफा, अब अंकल नाम से जाने जाते हैं, मै टोन बदल कर वेद को वेदा, और राम को रामा कहती हूँ, और अपनी इस तथा कथित सफलता पर गर्वित रहती ह...