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Health के लिए जानिए शहतूत के फायदे और गुण

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अगर आप शहतूत के फल खाना पंसद नही करते है, तो उसके फायदे और गुण जानकर, आज से खाना शुरू कर दोगे?   जयपुर: शहतूत का पेड़ लगभग हर जगह पाया जाता है। लेकिन अधिकतर बगीचो मे मिलता है। शहतूत का पौधा मध्यम आकार होता है। इसके मार्च अप्रेल मे फल आते है। इसका रंग काला व लाल होता है। शहतूत के फलो को छोटे बच्चे ज्यादा खाना पंसद करते है। सहतूत के फल खाने के फायदे - शहतूत के फल खाने से आँखो की रोशनी मे तेजी आती है। शहतूत के फल का जूस व शरबत बना कर पिये जाते है। शहतूत और नीम की छाल को पिसकर, मुहँ पर उसका लेप करने से किल मुहांसे से छुटकारा मिलता है। शहतूत मे विटामी A,फाॅस्फोरस और पोटैशियम अधिक होने के कारण,इसके सेवन से बच्चो को न्यूट्रिट्स तो खूब मिलते है। इसके साथ ही पेट किड़े भी खत्म हो जाते है। गर्मियो के समय मे शहतूत के पल खाने से प्यास शांत हो जाती है। क्योकि इसमे पानी अधिक मात्रा में होता है। जिस से थकान की समस्या मे भी आराम होता है। शहतूत के फल का रस जूस निकाल पीने से, खासकर दिल के रोगी और कोलेस्ट्ररोल नियन्त्रण करने मे राम बाण औसधि है। शहतूत खाने से खून से जुडी सभी बीमारी,और खू...

ड़ाॅ किरोड़ी लाल मीना रेलवे स्टेशन पर पहुंचा तो पुलिस प्रशासन में हड़कम्प,सभी यातायात को किया डार्वट

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दौसा-मंडावर थाना क्षेत्र के नांगल मीणा गांव के शोभाराम मीणा हत्या व लूटकाण्ड का खुलासा नहीं करने से नाराज ग्रामीणों के साथ लालसोट विधायक डॉ. किरोडीलाल मीणा ने मंगलवार को मंडावर पुलिस थाने के सामने गांधी चौक पर धरना दिया। दोपहर करीब एक बजे वे समर्थकों के साथ बांदीकुई-भरतपुर रेल मार्ग स्थित मंडावर रेलवे फाटक पर पहुंच गए। अचानक किरोड़ी के रेलवे फाटक पर पहुंचने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। रेलवे कर्मचारियों ने रेलवे टै्रक पर लाल झंडी लगाकर ऐहतियातन ट्रेनों को रोकने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी। आगरा-बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन को घोषराणा रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया गया। Dr. Kirodi Lal Meena महुवा पुलिस वृत्ताधिकारी राजेश मलिक, मंडावर थाना अधिकारी बृजेश मीणा, महुआ सीआई कालूराम मीणा जाप्ते के साथ रेलवे फाटक पर पहुंचे। उन्होंने लालसोट विधायक से बातचीत की, लेकिन वे अपनी मांगों को पर अड़े रहे। इसके बाद विधायक ने ग्रामीणों से वार्ता की और पुन: अधिकारियों से वार्ता कर करीब आधा घंटे बाद वापस थाने पर लौटे, तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। जहां थाने पर डॉ. किरोड़ी ने बताया कि 15 दिन में ...

होली के त्योहार की परम्परा व क्यों मनाया जाता है

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जयपुर- Holi होली के त्योहार को प्राचीन काल से ही रिती रिवाज के तरीके से मनाते आ रहें हैं। इस त्योहार को मनाने के कारण कई पोराणिक कथा, दन्त कथा, धार्मिक आस्था आदि का जिक्र मिलता है। धार्मिक आस्था-  Holi   हमारे धार्मिक ग्रंथों में होली मनाने का जिक्र मिलता है। कहा जाता है कि सत युग में राजा हिरणकस्यप राक्षस कुल में जन्म लिया था। हिरणकस्यप ने भगवान ब्रह्मा की तपस्या करके कई शक्तियाँ व वरदान माँगे। जिसके पश्चात वह स्वयं को भगवान मानने लग गया। सभी देवी देवताओं का घोर विरोध करने लगा। होली मनाने का कारण- राजा हिरणकस्यप के एक पुत्र जन्मा,जिसका नाम प्रहलाद था। राजकुमार धीरे धीरे बड़ा हुआ। उसको शिक्षा के लिए आश्रम में गुरु पास भेज दिया गया। जैसे जैसे शिक्षा में निपुण होता गया और भगवान विष्णु के परम भक्त बन गया। शिक्षा के पश्चात घर वापस आया। तो अपने पुत्र से शिक्षा के बारे पुछा और प्रहलाद ने कहा कि मेरा सबसे प्रिय और भगवान विष्णु है। हिरणकस्यप नाराज हो गए। उसने कहा कि बेटा में ही इस संसार में भगवान हूँ। लेकिन प्रहलाद नहीं माना, उसको बार बार समझा ने का प्रयास किया। लेकिन प्र...

हमारा समाज एक वृक्ष की तरह था, लेकिन हम जाति और धर्म में क्यों बट गए

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एक विशाल बरगद के पेड़ पर भाँति भाँति के पक्षी और जन्तु निवास करते थे। हंस, कौए, कोयल, गिलहरी, बंदर आदि। सबने अपनी अपनी डाली और टहनी चुन ली थी। सबका अपना अपना रहन सहन, खाना पीना पर सभी साथ साथ हँसी खुशी रहते थे। एक दूसरे के सुख दुख के साथी। पशु पक्षियों की तरह, मनुष्य एक वृक्ष मे से कैसे अलग हो गया - एक दिन एक लकड़हारा पेड़ काटने आया। पेड़ पर रहने वाले सभी जंतुओं, पक्षियों ने नोचना, चोंच मारना शुरू किया। लकड़हारा भाग खड़ा हुआ, अपने इरादे में सफल नहीं हो सका। फिर बाद में उसने युक्ति लगाई। कौए को बुलाकर बोला- हंस हमेशा तुम्हारी खिल्ली उड़ाता रहता है। तुम काले हो, आवाज भी कर्कश है। गंदगी खाते हो। कोयल भी तुम्हारी आवाज की खिल्ली उड़ाती है।  फिर हंस को अलग बुलाकर बोला - कौआ और कोयल तुमसे जलते हैं। तुम्हारा बेदाग सफेद रंग उनसे बर्दाश्त नहीं होता। इसी तरह सभी एक दूसरे से जलने लगे और उनका व्यवहार सिर्फ अपनी डाल, अपनी टहनी तक सीमित रह गया। लकड़हारा फिर आया। अबकी बार उसने एक डाल, जिसपर हंस रहते थे, काटनी शुरू की। हंस छटपटाए लेकिन बाकी पक्षी अपनी अपनी डाल पर इत्मीनान के साथ अपनी दिनच...